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Maa danteshwari Devi

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मां दंतेश्वरी देवी | Maa danteshwari Devi :->बस्तर क्षेत्र में दंतेवाड़ा जिले में मां दंतेश्वरी का प्रसिद्ध शक्तिपीठ स्थापित है कहा जाता है कि सती के शरीर से दांत का हिस्सा गिरने से इस पावन संगम स्थल का नाम दंतेश्वरी पड़ा|

मां दंतेश्वरी देवी | Maa danteshwari Devi | Shaktipeeth

बस्तर में प्रवाहित नदी शनि और जाटनी के संगम स्थल पर यह शक्तिपीठ स्थापित है| मां दंतेश्वरी छत्तीसगढ़ की जागृत देवी के रूप में प्रसिद्ध है कहा जाता है कि यहां होती मानने से मनोकामना पूर्ण होती है|

बस्तर क्षेत्र की कुलदेवी के रूप में प्रसिद्ध है| कोई भी मंगल कार्य पूर्ण करना यहां की प्राचीन परंपरा|

देवकी राज्य सीमा के संबंध में एक चरण में तत्कालीन और जंगल में मुगलों से परास्त होकर वस्त्र क्षेत्र में प्रवेश तथा राज्य स्थापना की महत्वकांक्षी   भी थी|

कहते हैं कि स्वपन में इन्हें अपनी कुलदेवी मां दंतेश्वरी के दर्शन हुए| राजा की महत्वाकांक्षा को देखते हुए मां दंतेश्वरी ने उन्हें वरदान दिया कि मार्गशीर्ष पूर्णिमा के दिन वह अपनी विजय यात्रा प्रारंभ करें| जहां तक भी वह जाएंगे वहां तक उनके राज्य का विस्तार हो जाएगा|

मां का यह आश्वासन था कि वह राजा के पीछे पीछे साथ चल रही है लेकिन साथ ही यह शर्त भी रखी कि राजा पीछे मुड़कर ना देखे नहीं तो रुक जाएंगे| दिन बीते के राज्य का विस्तार करते हुए एक रात शैतान के साथ पर पहुंचे | जानवरों की आवाज नदी संगम की रेत में थम गई| राजा ने उत्सुकता अवश्य पीछे मुड़ कर देख लिया इस शर्त पर देवी ने राजा को वरदान दिया था राजा  वह शर्त हार गया|तत्पश्चात राजा ने संगम तट पर देवी को स्थापित किया|

वस्त्र क्षेत्र की कुलदेवी मां दंतेश्वरी के प्रसिद्ध मंदिर के संबंध में पुराणों में लिखा है कि सदी के अंत में सिद्धांत का अर्थ सहित स्थल पर गिरा था इस कारण इस देवी को रक्तदंतिका अर्थात दंतेश्वरी देवी कहा जाता है|

इस  प्रतिष्ठित मंदिर में काले पत्थर से निर्मित प्रतिमा को दंतेश्वरी के नाम से स्थापित किया गया है| इस मूर्ति के विषय में एक रोचक तथ्य यह है कि प्रतिमा के वृत्ताकार खंड में नरसिंह द्वारा प्रणाम कश्यप के सहार का एक दृश्य चित्रित है| वैष्णव धर्म के साथ ऐसा समायोजन मंदिर के सामने स्थित उसे पूर्ण प्रमाणित होता है| पूर्व मुखी इस मंदिर में हिंदू धर्म से संबंधित अनेक मूर्तियां गणेश पार्वती नर्सिंग द्वारपाल आदि मंदिरों में रखी है|

मां की प्रतिमा की ऊंचाई 6 फीट चौड़ाई 5 फीट बाई 1 फीट है मूर्ति खड़ी मुद्रा में है जो मसूर की भर्ती हुई प्रदर्शित है दंतेश्वरी मां इस प्रतिमा में दाएं हाथ में त्रिशूल पदम लिए हुए हैं तथा बाएं हाथ में एवं पकड़े हुए हैं नकाशी युक्त है| मां के सिर के ऊपरी भाग में नरसिंह रूप धारण किए हुए मूर्ति निर्मित है और नरसिंह द्वारा हिरणाकुश का वध करते हुए दिखाया गया है|

मां के सिर के ऊपर है जो चांदी से निर्मित है तथा आभूषण है एवं वर्तमान में वस्त्र से अलंकृत है और अपने पैरों के नीचे किसी को दबाया हुआ है या मूर्ति एक पत्थर पर निर्मित है|

21 से युक्त सिंह द्वार की पूर्व दिशा में विराजमान हैं जो काले पत्थर के हैं बाई तरफ गणेश की बड़ी मूर्ति स्थापित है और नदी है तथा में द्वारपाल विराजमान है| 12 कास्ट स्तंभों पर सभागृह निर्मित है जिसके बीच में जो पत्थर के स्थान पर मंदिर निर्मित है यहां काले पत्थर की मूर्तियां स्थापित हैं सभा मंदिर शिखर युक्त है|

ग्रह पर दो नदी में बाई तरफ बीच में विष्णु कार्तिकेय और शिव मुद्रा में तथा पास में छोटा शिवलिंग स्थापित है प्रतिवर्ष दर्शन करते हैं

मार्ग परिचय:–

दंतेवाड़ा में जगदलपुर 87 रायपुर 383 दुर्गा 421 राजनंदगांव 462 बिलासपुर 403 में हैदराबाद 560 किलोमीटर दूर है निकटतम हवाई अड्डा रायपुर है

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