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श्री ललिता देवी मंदिर

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श्री ललिता देवी मंदिर :->प्रयाग में स्थित ललिता देवी की गणना शक्तिपीठों में होती है| मत्स्य पुराण, देवी भागवत, ब्रह्मांड पुराण, शिव पुराण, मार्कंडेय पुराण, भविष्य पुराण आदि ग्रंथों में ललिता देवी के महत्व का वर्णन किया गया है| वर्तमान काल में मीरापुर मोहल्ले में शिवप्रिया ललिता देवी का मंदिर है|

श्री ललिता देवी मंदिर | Shree Lalita Devi Mandir

यमुना नदी के तट पर सती की हंसता गुलिका गिरने से भगवती ललिता का प्रादभरर्व हुआ था।इस महाशक्ति के कर नख से 10 अवतार हुए थे| पांडवों ने लाक्षागृह से सकुशल निकलकर मीरापुर स्थित माँ ललिता की पूजा अर्चना की थी और वे यहां 3 दिन रूके थे |ललिता मंदिर के समीप आज भी पांडव ग्रुप विद्यमान बताया जाता है| ललिता देवी का मंदिर 108 फीट ऊंचा है|

इसका जीणों द्वार नवंबर 87 में पूज्यपाद प्र्भदत्त ब्रह्मचारी जी ने कराया था |नवरात्र में भगवती ललिता मां की त्रिकाल आरती की जाती है |यहां पर हर वर्ष वैशाख कृष्ण पक्ष की अष्टमी से तीन दिवसीय मेला लगता है |

शिव पुराण में बीवी इस शक्तिपीठ का विस्तार से उल्लेख है। यह भगवती के 108 सिद्ध पीठों में से एक है |ललिता देवी मंदिर के परिसर में एक पीपल का वृक्ष भी है |उसी वृक्ष के पास शिव जी का मंदिर है |जिसे ललितेश्वर महादेव कहते हैं| मंदिर परिसर में से एक हनुमान जी का भव्य मूर्ति स्थापित है |म मंदिरों में जीणोद्वार कार्य भी जारी है|

मंदिर में प्रतिदिन प्रातः 5:30 बजे से तथा सायाकाल 7:30 बजे आरती होती है |प्रतिदिन प्रातः सायाकाल श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है |चैत्र नवरात्र तथा आश्विन नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना, शतचंडी पाठ यज्ञ, हवन तथा शृंगार का आयोजन होता है।

कृष्णाअष्टमी, शरद पूर्णिमा के पर्व की चतुर्दशी के अवसर पर माता का विशेष रूप से शृंगार होता है| चैत्र कृष्ण अष्टमी को तीन दिवसीय मेला लगता है |यह मेला सप्तशती से प्रारंभ होकर नवमी तक चलता है| प्रतिवर्ष 10 -15 लाख भगत दर्शन करते हैं।

मंदिर में प्रतिदिन प्रातः 5:30 बजे से तथा सायाकाल 7:30 बजे आरती होती है |प्रतिदिन प्रातः सायाकाल श्री दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है |चैत्र नवरात्र तथा आश्विन नवरात्र में विशेष पूजा-अर्चना, शतचंडी पाठ यज्ञ, हवन तथा शृंगार का आयोजन होता है। कृष्णाअष्टमी, शरद पूर्णिमा के पर्व की चतुर्दशी के अवसर पर माता का विशेष रूप से शृंगार होता है|

चैत्र कृष्ण अष्टमी को तीन दिवसीय मेला लगता है |यह मेला सप्तशती से प्रारंभ होकर नवमी तक चलता है| प्रतिवर्ष 10 -15 लाख भगत दर्शन करते हैं|

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