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सनातन धर्म क्या है | Sanatan dharm kya hai

सनातन_धर्म_क्या_है_Sanatan_dharm_kya_hai

सनातन धर्म क्या है | Sanatan dharm kya hai :->सनातन धर्म की दुनिया में सबसे पुराना धर्म है जिसका ना कोई आधी है और ना कोई अंत है | सबसे ज्यादा सनातनी भारतवर्ष में पाए जाते हैं| यह भी मान्यता है कि पहले पूरी पृथ्वी में जितने भी इंसान थे वे सभी सनातनी थे| सुनाती धर्म में बहुत सभ्यता में पाई जाती हैं| 

सनातन धर्म क्या है | Sanatan dharm kya hai

सनातन धर्म को ही असल में हिंदू धर्म कहा जाता है| हिंदू कोई धर्म नहीं है सिंधु नदी के किनारे रहने वाले लोगों को हिंदू बोलते थे| सच मायने में तो सनातन धर्म ही जो युगो युगो से चल रहा है सतयुग द्वापर त्रेता और कलयुग में|sanatan dharm kya h यह वह धर्म है जो इंसान को इंसान बनाने में उसकी मदद करता है जो इंसान को उसकी जीवन पद्धति के साथ अवगत कराता है| सनातन धर्म ही मनुष्य को भगवान के साथ मिलने के लिए एक रास्ता दिखाता है

सनातन धर्म का अर्थ क्या है (sanatan dharma meaning):

जो सृष्टि एवं ईश्वर को अनादि अनंत और सनातन मानते हैं जो लोग यह मानते हैं कि उनके धर्म शिक्षा उपदेशों और अवतारों का कोई अंत नहीं है वह सनातनी कहलाए| भगवान श्री विष्णु श्री राम जय श्री कृष्ण के अवतरित होने से पहले ही सनातन धर्म विद्यमान था |अर्थात सनातन धर्म का अर्थ है जिसका आदि और अंत नहीं है|

संपूर्णता जाने सनातन धर्म क्या है(sanatan dharama ki puri jaankari):

इस संदर्भ में हमें सबसे पहले यह समझना हुआ कि धर्म क्या है| जो धारण करने योग्य हो वही धर्म है|

एक होता है धर्म और एक होता है रिलीजन दोनों शब्द एक जैसे अर्थ प्रकाशित नहीं करते अंग्रेजी में रिलीजन शब्द का अर्थ लिया गया है ए सिस्टम ऑफ  faith| धर्म शब्द का अर्थ होता है स्वभाव जो जिसका स्वभाव है वही उसका धर्म है|

धर्म दो प्रकार के होते हैं  नैमित्तिक धर्म और नित्य धर्म| ठीक उसी प्रकार के दो प्रकार के धर्म देखे जाते हैं नैमित्तिक और नित्य| किंतु इन्हें समझने से पहले यह जानना आवश्यक है कि स्वयं जीव का रूप क्या है? जब स्वरूप का ज्ञान होगा तभी समझ में आ सकता है कि जीव का कौन सा धर्म नैमित्तिक है और कौन सा धर्म नित्य है|

अब विचार किया जाए कि जीव कौन है? साधारण का हम शरीर को भी व्यक्ति समझते हैं लेकिन श्री व्यक्ति नहीं है हम लोग कहते हैं कि मेरा शरीर मेरा मन मेरी बुद्धि इत्यादि| जबकि मैं शरीर में ऐसा कोई नहीं कहता  इस शरीर से अलग है और यही शरीर अलग है| जब तक शरीर में चेतना रहती है तभी तक उसे व्यक्ति कहा जाता है चेतना के चले जाने पर स्वरूपी शरीर को कोई व्यक्ति नहीं कहता|

इसलिए मुर्दा शरीर को जलाने से कोई दंड नहीं मिलता| श्री में जब चेतना है जिसे आत्मा कहते हैं उसे ही व्यक्ति कहा जाता है  शरीर को नहीं| जीत सकता के रहने में मैं हूं और इस सप्ताह के ना रहने पर मैं नहीं हूं अर्थात मैं आत्मा हूं आत्मा नित्य है श्री नृत्य नहीं है आप जीवन के रूप के बीच में यह विचार किया जाए कि जीव आत्मा कहां से आई है और इसका धर्म क्या है? जी भगवान का अंश नहीं है यह उनकी शक्ति का एक अंश मात्र है|

उस परमपिता की शक्तियां हैं उनमें से दो शक्तियां तथा अपरा है| पराशक्ति जीवात्मा है और अपरा शक्ति स्कूल और सूक्ष्म शरीर है| अगर हम जीव को भगवान मानेंगे तो भगवान के प्रति गलत धारणा होगी| जी भगवान की शक्ति का एक छोटा सा अंश है भगवान नहीं|

इसमें भगवान और भगवान की शक्ति और शक्ति का अजीत है आपस में इनका संबंध भी लिखते हैं और इनका धर्म भी लिखते हैं किसी धर्म को कहते हैं सनातन धर्म सनातन का अर्थ होता है जो पहले भी था अभी भी है और आजकल के पश्चात भी रहेगा किंतु श्री सुनाते नहीं है क्योंकि श्री नाशवान है|

सनातनी किसे कहते हैं | Sanatani kese kehte hai

प्राचीन संस्कारों को मन वचन कर्म से मारने वाले को सनातनी कहते हैं और जो सदैव सर्वदा निर्विकार रूप में स्थित रहता है उसे सनातन कहते हैं| श्रीमद्भागवत गीता में वर्णित जीव विज्ञान न्याय का परमाणु रूप पृथ्वी अग्नि तेज वायु आदि पदार्थ शाश्वत और सनातन की श्रेणी में आते हैं|

सनातन धर्म के नियम |Sanatan dharm ke niyam :

प्रतिदिन मंदिर जाएं|

गीता का पाठ करें और शिवलिंग की चरणामृत ले|

प्रकृति पशु पूजा करें|

प्रतिदिन संध्या पूजन भी करें|

वेद की बताएं ज्ञान के मुताबिक चलें|

धर्म अर्थ काम और मोक्ष की धारणा  को धारण करें|

नियम    कर्मकांडी ब्राह्मण द्वारा जनेऊ धारण करें|

एकादशी  व्रत संकल्पित रहे|

नवरात्रि पूजा का विशेष महत्व|

निष्कर्ष:

सनातन धर्म तब से है जब से इस पृथ्वी का आगमन भी नहीं हुआ था बहुत भाग्यशाली लोग हैं जो सनातन धर्म में पैदा हुए हैं| लेकिन इसका अर्थ यह नहीं बनता कि उस प्राणी को दूसरे धर्मों की भी इज्जत नहीं करनी चाहिए| बल्कि उसे  अन्य धर्म  की भी इज्जत करनी है | सच्चा सनातनी वही है जिसके हृदय में समानता का भाव  हो|  अगर आपको यह लेख website पसंद है तो कृपया इसे अन्य अपने मित्रों के साथ शेयर करें और नीचे कमेंट करके बताएं|

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