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अर्गला स्तोत्रम् | Argala Stotram lyrics

  • Stotram

अर्गला स्तोत्रम् | Argala Stotram lyrics :->श्री दुर्गा सप्तशती में देवी कवच के बाद अर्गला स्तोत्र पढ़ने का विधान है। अर्गला कहते हैं अग्रणी या अगड़ी। सारी बाधाओं को दूर करने वाला। किसी भी कार्य की सिद्धि के लिए आवश्यक है कि आप आगे बढ़कर अपना और दूसरों का मार्ग प्रशस्त करें। संसार में कोई ऐसी समस्या नहीं है, जिसका समाधान देवी न करती हों। बस, उनको सच्चे दिल से पुकारने की आवश्यकता है। अर्गला स्तोत्र के यूं तो समस्त मंत्र ही सिद्ध हैं। ये सभी मारण और वशीकरण मंत्र हैं। सभी मंत्रों में हम देवी भगवती से कामना करते हैं कि हमको रूप दो, जय दो, यश दो और शत्रुओं का नाश करो।

अर्गला स्तोत्रम् | Argala Stotram lyrics

ॐ जयन्ती मङ्गला काली भद्रकाली कपालिनी।
दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नमोऽस्तु ते॥1॥

जय त्वं देवि चामुण्डे जय भूतार्तिहारिणि।
जय सर्वगते देवि कालरात्रि नमोऽस्तु ते॥2॥

मधुकैटभविद्राविविधातृवरदे नमः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥3॥

महिषासुरनिर्णाशि भक्तानां सुखदे नमः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥4॥

रक्तबीजवधे देवि चण्डमुण्डविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥5॥

शुम्भस्यैव निशुम्भस्य धूम्राक्षस्य च मर्दिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥6॥

वन्दिताङ्‌घ्रियुगे देवि सर्वसौभाग्यदायिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥7॥

अचिन्त्यरुपचरिते सर्वशत्रुविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥8॥

नतेभ्यः सर्वदा भक्त्या चण्डिके दुरितापहे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥9॥

स्तुवद्‌भ्यो भक्तिपूर्वं त्वां चण्डिके व्याधिनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि१॥10॥

चण्डिके सततं ये त्वामर्चयन्तीह भक्तितः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥11॥

देहि सौभाग्यमारोग्यं देहि मे परमं सुखम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥12॥

विधेहि द्विषतां नाशं विधेहि बलमुच्चकैः।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥13॥

विधेहि देवि कल्याणं विधेहि परमां श्रियम्।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥14॥

सुरासुरशिरोरत्ननिघृष्टचरणेऽम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥15॥

विद्यावन्तं यशस्वन्तं लक्ष्मीवन्तं जनं कुरु।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥16॥

प्रचण्डदैत्यदर्पघ्ने चण्डिके प्रणताय मे।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥17॥

चतुर्भुजे चतुर्वक्त्रसंस्तुते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥18॥

कृष्णेन संस्तुते देवि शश्‍वद्भक्त्या सदाम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥19॥

हिमाचलसुतानाथसंस्तुते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥20॥

इन्द्राणीपतिसद्भावपूजिते परमेश्‍वरि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥21॥

देवि प्रचण्डदोर्दण्डदैत्यदर्पविनाशिनि।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥22॥

देवि भक्तजनोद्दामदत्तानन्दोदयेऽम्बिके।
रुपं देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि॥23॥

पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानुसारिणीम्।
तारिणीं दुर्गसंसारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥24॥

इदं स्तोत्रं पठित्वा तु महास्तोत्रं पठेन्नरः।
स तु सप्तशतीसंख्यावरमाप्नोति सम्पदाम्॥25॥

॥ इति देव्या अर्गलास्तोत्रं सम्पूर्णम् ॥

Argala Stotram lyrics in English

Jayantii Manggalaa Kaalii Bhadrakaalii Kapaalinii |
Durgaa Kssamaa Shivaa Dhaatrii Svaahaa Svadhaa Namostu Te ||1||

Jaya Tvam Devi Caamunndde Jaya Bhuu-Taapa-Haarinni |
Jaya Sarva-Gate Devi Kaalaraatri Namostu Te ||2||

Madhu-Kaittabha-Vidhvamsi Vidhaatr-Varade Namah |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||3||

Mahissaasura-Nirnaashi vidhatri varde Namah |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||4||

Vandita-Angghri-Yuge Devi Sarva-Saubhaagya-Daayini |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||8||

Raktabiija-Vadhe Devi Canndda-Munndda-Vinaashini |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||6||

Acintya-Ruupa-Carite Sarva-Shatru-Vinaashini |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||9||

Natebhyah Sarvadaa Bhaktyaa Ca-Aparnne Durita-Apahe |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||10||

Stuvadbhayo Bhakti-Puurvam Tvaam Cannddike Vyaadhi-Naashini |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||11||

Cannddike Satatam Yuddhe Jayanti Paapa-Naashini |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||12||

Dehi Saubhaagyam-Aarogyam Dehi Devi Param Sukham |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||13||

Vidhehi Dvissataam Naasham Vidhehi Balam-Uccakaih |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||15||

Vidhehi Devi Kalyaannam Vidhehi Vipulaam Shriyam |

Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||14||

Vidyaavantam Yashasvantam Lakssmiivantan.cha Maam Kuru |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||17||

Pracanndda-Daitya-Darpa-Ghne Channddike Prannataaya Me |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||19|

Caturbhuje Catur-Vaktra-Samstute Param-[Ii]eshvari |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||20||

Krissnnena Samstute Devi Shashvad-Bhaktyaa Sada-Ambike |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||21||

Himaachala-Sutaa-Naatha-Samstute Param-[Ii]eshvari |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||22||

Sura-Asura-Shiro-Ratna-Nighrsstta-Charanne-[A]mbike |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||16||

Indraannii-Pati-Sadbhaava-Puujite Param-[Ii]eshvari |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||23||

Devi Bhakta-Jano[a-U]ddaama-Datta-[A]anando-[U]daye-[A]mbike |
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||24||

Putrandehi dhanandehi sarvkamansach dehime
Ruupam Dehi Jayam Dehi Yasho Dehi Dvisso Jahi ||24||

Patnim manoram dehi manovrutanusarinim,
Taarinni Durga-Samsaara-Saagarasya-Acalo[a-U]dbhave |

Idam Stotram Patthitvaa Tu Mahaastotra Patthen-Narah |
Saptashatiim Sama-[A]araadhya Varam-Aapnoti Durlabham ||27||

argala stotram lyrics pdf

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