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दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa lyrics

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सप्तश्लोकी_दुर्गा_स्तोत्रम्_Saptashloki_Durga_Stotram

दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa lyrics :->हिंदी अर्थ के साथ दुर्गा चालीसा। दुर्गा चालीसा एक स्तुति है जिसका पाठ मां दुर्गा की पूजा करने और उनसे आशीर्वाद लेने के लिए किया जाता है। हमने दुर्गा चालीसा श्लोकों के आसान अर्थ का अनुवाद किया है। इससे दुर्गा चालीसा में प्रयुक्त श्लोकों की स्पष्ट समझ मिलेगी। दुर्गा चालीसा का वास्तविक अर्थ जानने के बाद पाठ करना बहुत फलदायी साबित होगा और शुद्ध मन से दुर्गा चालीसा का पाठ करने वाले भक्तों को निश्चित रूप से माँ दुर्गा की कृपा प्राप्त होगी।

दुर्गा चालीसा | Durga Chalisa lyrics

नमो नमो दुर्गे सुख करनी
नमो नमो दुर्गे दुःख हरनी

निरंकार है ज्योति तुम्हारी
तिहूँ लोक फैली उजियारी

शशि ललाट मुख महाविशाला
नेत्र लाल भृकुटि विकराला

रूप मातु को अधिक सुहावे
दरश करत जन अति सुख पावे

तुम संसार शक्ति लै कीना
पालन हेतु अन्न धन दीना

अन्नपूर्णा हुई जग पाला
तुम ही आदि सुन्दरी बाला

प्रलयकाल सब नाशन हारी
तुम गौरी शिवशंकर प्यारी

शिव योगी तुम्हरे गुण गावें
ब्रह्मा विष्णु तुम्हें नित ध्यावें

रूप सरस्वती को तुम धारा
दे सुबुद्धि ऋषि मुनिन उबारा

धरयो रूप नरसिंह को अम्बा
परगट भई फाड़कर खम्बा

रक्षा करि प्रह्लाद बचायो
हिरण्याक्ष को स्वर्ग पठायो

लक्ष्मी रूप धरो जग माहीं
श्री नारायण अंग समाहीं

क्षीरसिन्धु में करत विलासा
दयासिन्धु दीजै मन आसा

हिंगलाज में तुम्हीं भवानी
महिमा अमित न जात बखानी

मातंगी अरु धूमावति माता
भुवनेश्वरी बगला सुख दाता

श्री भैरव तारा जग तारिणी
छिन्न भाल भव दुःख निवारिणी

केहरि वाहन सोह भवानी
लांगुर वीर चलत अगवानी

कर में खप्पर खड्ग विराजै
जाको देख काल डर भाजै

सोहै अस्त्र और त्रिशूला
जाते उठत शत्रु हिय शूला

नगरकोट में तुम्हीं विराजत
तिहुँलोक में डंका बाजत

शुम्भ निशुम्भ दानव तुम मारे
रक्तबीज शंखन संहारे

महिषासुर नृप अति अभिमानी
जेहि अघ भार मही अकुलानी

रूप कराल कालिका धारा
सेन सहित तुम तिहि संहारा

परी गाढ़ सन्तन पर जब जब
भई सहाय मातु तुम तब तब

अमरपुरी अरु बासव लोका
तब महिमा सब रहें अशोका

ज्वाला में है ज्योति तुम्हारी
तुम्हें सदा पूजें नरनारी

प्रेम भक्ति से जो यश गावें
दुःख दारिद्र निकट नहिं आवें

ध्यावे तुम्हें जो नर मन लाई
जन्ममरण ताकौ छुटि जाई

जोगी सुर मुनि कहत पुकारी
योग न हो बिन शक्ति तुम्हारी

शंकर आचारज तप कीनो
काम अरु क्रोध जीति सब लीनो

निशिदिन ध्यान धरो शंकर को
काहु काल नहिं सुमिरो तुमको

शक्ति रूप का मरम न पायो
शक्ति गई तब मन पछितायो

शरणागत हुई कीर्ति बखानी
जय जय जय जगदम्ब भवानी

भई प्रसन्न आदि जगदम्बा
दई शक्ति नहिं कीन विलम्बा

मोको मातु कष्ट अति घेरो
तुम बिन कौन हरै दुःख मेरो

आशा तृष्णा निपट सतावें
मोह मदादिक सब बिनशावें

शत्रु नाश कीजै महारानी
सुमिरौं इकचित तुम्हें भवानी

करो कृपा हे मातु दयाला
ऋद्धिसिद्धि दै करहु निहाला

जब लगि जिऊँ दया फल पाऊँ
तुम्हरो यश मैं सदा सुनाऊँ

श्री दुर्गा चालीसा जो कोई गावै
सब सुख भोग परमपद पावै

देवीदास शरण निज जानी
कहु कृपा जगदम्ब भवानी

॥दोहा॥
शरणागत रक्षा करे,
भक्त रहे नि:शंक
मैं आया तेरी शरण में,
मातु लिजिये अंक

दुर्गा_चालीसा
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