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Prabhu Ji Araj Karu Lyrics

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प्रभुजी मैं अरज करुँ | Prabhu Ji Araj Karu Lyrics :->:Meera Bhajan by Kishori Amonkar – Prabhu Ji Main Araj Karun.

प्रभुजी मैं अरज करुँ | Prabhu Ji Araj Karu Lyrics

प्रभुजी मैं अरज करुँ छूं म्हारो बेड़ो लगाज्यो पार।।

इण भव में मैं दु:ख बहु पायो संसा-सोग निवार।
अष्ट करम की तलब लगी है दूर करो दुख-भार।।
यों संसार सब बह्यो जात है लख चौरासी री धार।
मीरा के प्रभु गिरधर नागर आवागमन निवार।। 

प्रभु जी —>ईश्वर (श्री कृष्ण )
अरज —>विनय, प्रार्थना।
करू छूं —>करती हूँ।
बेड़ो-बेड़ा से आशय है नाँव, —>ईश्वर मेरे जीवन रूपी नाँव को आप पार लगा देना।
इण – —>इस।
भव- —>संसार।
दुःख बहु पायो- —>बहुत अधिक (बहु ) दुःख पाया है।
अष्ट- —>आठ।
बह्यो जात है – —>बहता जाता है।
लख चौरासी री धार —>चौरासी योनियों की धारा।
आवागमन निवार —>जन्म मरण का चक्र मिटाओं।

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