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नाथ सकल संपदा तुम्हारी | Nath Sakal Sampada Tumhari

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नाथ सकल संपदा तुम्हारी | Nath Sakal Sampada Tumhari :->यह श्लोक इस सुंग बी थे पूज्य राजन जी | इस में बड़े हे बिनम्र भाषा भगवन की स्तुति की है|

नाथ सकल संपदा तुम्हारी | Nath Sakal Sampada Tumhari |pujya rajan jee

नाथ सकल संपदा तुम्हारी।
मैं सेवकु समेत सुत नारी॥


अर्थ:- अंत में जब विश्वामित्रजी ने विदा माँगी,तब राजा प्रेममग्न हो गए और पुत्रों सहितआगे खड़े हो गए। (वे बोले-) हे नाथ!यह सारी सम्पदा आपकी है।मैं तो स्त्री-पुत्रों सहित आपका सेवक हूँ॥

करब सदा लरिकन्ह पर छोहू।
दरसनु देत रहब मुनि मोहू॥


अर्थ:- और जब तक मेै जीवित हूँ तब तकआप मुझे अपना शुभ दरशन देते रहिये।।

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