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Vidhna Tere Lekh Kisi Ki Samjh Na Aate Hain lyrics

bhajan

विधना तेरे लेख किसी की समझ ना आते हैं | Vidhna Tere Lekh Kisi Ki Samjh Na Aate Hain :-> भक्त को भगवान से और जिज्ञासु को ज्ञान से जोड़ने वाला एक अनोखा अनुभव। तिलक प्रस्तुत करते हैं दिव्य भूमि भारत के प्रसिद्ध धार्मिक स्थानों के अलौकिक दर्शन। दिव्य स्थलों की तीर्थ यात्रा और संपूर्ण भागवत दर्शन का आनंद। दर्शन दो भगवान!

विधना तेरे लेख किसी की समझ ना आते हैं | Vidhna Tere Lekh Kisi Ki Samjh Na Aate Hain

जन जन के प्रिय राम लखन सिया वन को जाते है
जन जन के प्रिय राम लखन सिया वन को जाते है
विधना तेरे लेख किसी के समझ न आते है
जन जन के प्रिय राम लखन सिया वन को जाते है | |

एक राजा के राज दुलारे वन-वन फिरते मारे-मारे
एक राजा के राज दुलारे वन-वन फिरते मारे-मारे
भूनी हो कर रहे कर्म गति टरे नहीं काहू के टारे
सबके कष्ट मिटाने वाले कष्ट उठा ते हैं
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है
विधना तेरे लेख किसी के समझ न आते है | |

पग से बहे लहू की धारा हरी चरणों से गंगा जैसे
पग से बहे लहू की धारा हरी चरणों से गंगा जैसे
संकट सहज भाव से सहते और मुकाते है
जन जन के प्रिये राम लखन सिया वन को जाते है
विधना तेरे लेख किसी के समझ न आते है | |

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