अक्षय तृतीया का उत्सव भगवान कृष्ण की आस्था और सुदामा के साथ दोस्ती से जुड़ा हुआ है।

इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने सुदामा की पत्नी द्वारा भेजे गए कुछ अक्षत यानि चावल को ग्रहण करके सुदामा को तीन लोक की दौलत दे दी जो उसके भाग्य में भी नहीं थी

इसीलिए इस दिन का विशेष महत्व है कि थोड़ा सा ही पुण्य प्रभु के नाम से अगर किया जाए तो उसका अनंत फल मिलता है|

इसीलिए इस दिन का विशेष महत्व है कि थोड़ा सा ही पुण्य प्रभु के नाम से अगर किया जाए तो उसका अनंत फल मिलता है|