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ज्वाला माता मंदिर |Jwala Mata Mandir

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ज्वाला माता मंदिर |Jwala Mata Mandir :–> हिमाचल प्रदेश के जिला काँगड़ा में यह शक्तिपीठ स्थापित है | यह धूम देवी का स्थान है |यह 51 शक्तिपीठो में आता है |इस तीर्थ में जो देवी के जो दर्शन ज्योतिओ के रूप में किया जाते है यह ज्योतिया कभी काम यह अधिक भी रहती है |

ज्वाला माता मंदिर |Jwala Mata Mandir|jwala mata ka mandir

क्यों पुकारा जाता है देवी को ज्वाला जी के नाम से (jwala mata mandir ko jwala ji ke naam se kyu pukara jata hai ):-

मंदिर के द्वार के सामने चांदी के आले में जो मुख्य ज्योति सुशोभित है उसको महाकाली कहा जाता है महाकाली ज्योति के निचे भंडार भरने वाली,अन्न धन से सदैव परिपूर्ण करने वाली माता अन्नपूर्णा की पवित्र की ज्योति है | तीसरी ज्योति चण्डीमाता की है चौथी पवित्र ज्योति हिंगलाज भवानी की है |पांचवी ज्योति महालक्ष्मी की है |छटवी ज्योति विंध्यबासिनि एवं सातवीं ज्योति माँ सरस्वती की है |

आठवीं ज्योति माँ अम्बिका की और नोवी ज्योति माँ अंजना की है |पर्वत की चटान से नो भीं भीं ज्योति प्रज्वलित होती है | इस कारन देवी को ज्वालाजी के नाम से पुकारा जाता है |

कैसे हुआ मंदिर का निर्माण (kaise hua Mandir ka nirman ):-

किंवदंती है की सतयुग में सम्राट भूमिचंद को जब अनुमान हुआ की भगवती की जीवा भगवन विष्णु के धनुष से काटकर हिमालय के धौलीधार पर्वतो पर गिरी है |तब उनो ने नगरकोट काँगड़ा में एक छोटा सा मंदिर भगवती सती के नाम से बनवा दिया |


इसके कुछ वर्षो बाद कैसे ग्वाले के सम्राट ने भूमिचंद को सुचना दी की उसने अमुक पर्बत पर ज्वाला निकलती देखी|जो ज्योति के समान निरंतर जलती है |फिर महाराज जी ने स्वम् आकर उस स्थान के दर्शन किए और घोर बन में मंदिर का निर्माण किया |पांचो पांडवो ने भी ज्वालाजी की यात्रा की और मंदिर का जीणोंद्वार कराया |

गोरख डिब्बी का रहस्य(Gorakh dibi ka rehasya) :-

श्री ज्वाला देवी पर गोरख डिब्बी नमक पवित्र स्थान है यहाँ एक सहोता से कुंड में जल निरन्तर खोलता रहता है और देखने में गर्म परतीत होता है | परन्तु वास्तव में जल ठंडा है कहा जाता है की जहाँ पर गोरख नाथ जी ने तपस्या की थी |बाद में बादशाह अकबर ,महाराजा रंजीत जी जैसे लोक जहां आये थे|

बादशाह अकबर का सोने का छत्र (Badshah akbr ka sone ka chatr ):-

यहाँ पर आज भी अकबर का चढ़ाया हुआ सवा मन का सोने का छत्र आज भी यहाँ मजूद है | और देखा जा सकता है अकबर इस बात का घमंड होगया था की मैंने माँ को सोने का छात्र चढ़ाया माता ने उसका घमंड तोड़ने के लिया उस सोने से बने हुए धात को हे बदल दिया | उसके बाद आज तक कोई भी विज्ञानी आजतक यह पता नहीं लगा स्का की वो धात की धातु से बनी है |

वर्तमान में तीर्थ कैसे प्रतीत होता है (Vartman mein tirth kaise prteet hota hai ):-

वास्तव में माता ज्वाला देवी का मंदिर बहुत सूंदर एवं भव्य दिखाई देता है जिसे देखने मात्र सब कष्ट ,पाप ,चिंता से भक्त रहित हो जाता है |मंदिर के शिखर को स्वर्ण पत्रों से अलंकृत किया गया है |मंदिर परिसर में में हवनकुंड ,लैंगर भवन ,कमेटी का कार्यालय ,विशिस्ट व्यक्तियों के बैठने का स्थान एवं अन्य बहुत से भवन बने है |

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Source :–|>https://jawalaji.in/

माता की प्रतिदिन कितनी आरती होती (kitne baar hote mata ki aarti )है :-

मंदिर कमेटी द्वारा माता की प्रतिदिन पांच आरतियो की जाती है | प्रात: काल ब्रह्ममहूर्त में, दो घंटे बाद मंगला आरती ,मध्यान काल में तीसरी आरती ,चौथी आरती सायंकाल में एवं रात्रि 10 बजे पांचवी शयन आरती होती है |जिसमे दूध मलाई का भोग लगाया जाता है |

कितने प्रकार से होती माता ज्वाला की पूजा(kitne prkar ki hote hai mata ki pooja ) :-

ज्वाला माता जी की पूजा तीन प्रकार से होती है- प्रथम पंचोपचार ,द्वित्य दशोपचार ,तृतय षोडशोपचार |भक्तगण अपनी सुबिधानुसार पूजा करते है |

ज्वालामुखी तीर्थ के अन्य दर्शनीय स्थलों ( Jwala mata ke nazdiki darshniya sthal ):-

मवीरकुंड, गोरख डिब्बी ,राधाकृष्णन मंदिर ,शिवशक्ति लाल शिवालय ,काली भैरव मंदिर ,सिंह नागार्जुन ,अम्बिकेश्वर महादेव ,टेढ़ा मंदिर ,अष्टदश भुजा अन्य दर्शनीय स्थलों के नाम |मंदिर में भिभिन्न राजा महाराजा ,संतो एवं राजपुरषो आगमन लगातार बना रहा |

मंदिर की सम्पति अथवा कर्मचारी( mandir ki sampti athwa karmchari ) :-

मंदिर की भू सम्पति 14 एकड़ है मंदिर २ अकड़ में निर्मित है |मंदिर का संचालन सर्कार द्वारा गठित नो सदस्यीय के ट्रस्ट द्वारा होता है |ट्रस्ट कमेस्ट्री का वार्षिक बजट सादे पांच करोड़ है |मंदिर में 141 परिवारो के 450 पंडे,पुजारी 51 कर्मचारी एवं 18 होमगार्ड कार्यरत है |

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Source:->https://jawalaji.in/

यात्रियों की संख़्या(yatrio ki sankyea ):-

सामान्य दिनों में 10 -12 हज़ार ,चैत्र ,आश्विन और श्रवण अष्टमी ,नवरात्री में 10 लाख एवं प्रतिवर्ष 30 – 32 लाख भक्त दर्शन करते है |

मार्ग परिचय(Marg parichay ) :-

ऊना से 90 ,काँगड़ा से 35 किमी . दूर है |होशिअरपुर से गौरीपुर डेरा हुएएवं पठानकोट से भी ज्वालादेवी जाया जा सकता है |

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